तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
मैं बोहोत हांसी देखी आप पर, अनगिनती हक इ...

Question: मैं बोहोत हांसी देखी आप पर, अनगिनती हक इस्क। इलम धनी के देखाइया, मैं दोऊ देखे बेसक ।। प्र -12/43 सागर इस चौपाई का बेवरा करें सुन्दरसाथ जी
Answer: यहां संसार में यदि आंखें खोलकर देखो तो श्री राजजी महाराज का इश्क बेशुमार है जब अपने इश्क की रहनी को देखकर हंसती हूं तो मैंने अपने ऊपर ही बेशुमार हंसी को देखा। श्री राजजी महाराज के बेशुमार इश्क को देखा। यह दोनों की पहचान श्री राजजी महाराज की जागृत बुद्धि उनके ईलम ने कराई।