तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
पचास हजार बाग किए खैरात, बरकत नुसखे भई स...

Question: पचास हजार बाग किए खैरात, बरकत नुसखे भई सिफात । हवेलियां जो थी वैरान, सो किया खड़ियां हुए मेहरबान ।। 21/4 ब. क्या. इस चौपाई के मायने बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: परमधाम की जमीन पचास हजार योजन की है जो मोमिनों को कुलजम सरूप की वाणी के नुस्खे से प्राप्त हुई। मोमिनों के अर्श दिल ही हवेलियां हैं। जो कुलजम सरूप की वाणी के बिना वीरान थीं। श्री प्राणनाथजी महाराज ने अपनी वाणी से पहचान कराकर इन मोमिनों को जागृत कर दिया।