आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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मुहम्मद आए ईसा मिने, तब अहमद हुआ स्याम ।...

Shri Nijanand Samparday
Question: मुहम्मद आए ईसा मिने, तब अहमद हुआ स्याम । अहमद मिल्या मेंहदी मिने, ऐ तीनों मिल भये इमाम ।। इस चौपाई का बेवरा करें सुन्दरसाथ जी

Answer: ईसा रूहअल्ला (श्यामा जी के पहले तन श्री देवचन्द्र जी) में जब मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम (अक्षर की आत्मा) का प्रवेश हुआ तो उस स्वरूप को अहमद कहलाने की शोभा मिली। जब यह स्वरूप श्यामा जी के दूसरे तन (श्री मिहिरराज जी) में मेंहदी (महामति) में मिला तो इन तीनों स्वरूपों को ईमाम अर्थात् (प्राणनाथ) कहा गया। पांचों शक्तियों के श्री इन्द्रावती जी के धाम-हृदय में विराजमान होने पर उन्हें महामति की शोभा मिली। इस स्वरूप में अक्षर ब्रह्म की जागृत बुद्धि तथा अक्षरातीत की निजबुद्धि दोनों विद्यमान हैं, इसलिये इस स्वरूप से अधिक ज्ञान अन्य किसी भी स्वरूप के द्वारा नहीं उतरा। 'महामति' का तात्पर्य महान बुद्धि वाला नहीं अपितु परब्रह्म का महानतम् ज्ञान जिसके तन से प्रकट हुआ, वह 'महामति' है। इस स्वरूप को कतेब पक्ष में मेंहदी कहा गया है। इस प्रकार इमाम मेहदी या महामति प्राणनाथ शब्द समानार्थक है।