आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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फेर आए रसूल स्याम मिल, सोई फेर आये यार।...

Shri Nijanand Samparday
Question: फेर आए रसूल स्याम मिल, सोई फेर आये यार। देख निसवत पांचों दुनीमें, क्यों छोड़ें असल अर्स प्यार ।। इस चौ. का बेवरा करें सुन्दरसाथ जी

Answer: अब दूसरी बार हुकम के स्वरूप श्री मुहम्मद साहब जिनमें आत्म अक्षर और जोश धनी धाम दो शक्तियां थी जो ब्रज रास खेल कर अरब में श्री महमंद साहब के अंदर आ गई थी वोह और श्री श्यामाजी दोनों मिलकर श्री प्राणनाथजी हकी सरूप के अन्दर हैं और वही सखियां भी फिर सुन्दरसाथ के रूप में आई हैं। यह श्री प्राणनाथजी के अन्दर पांचों शक्तियों (धनीजी का जोश, श्यामाजी, आत्म-अक्षर, जागृत बुद्धि और हुकम) के दर्शन करती हैं। यह सुन्दरसाथ अपने श्री प्राणनाथजी को जिनसे अर्श का प्यार है, सम्बन्ध है, उन्हें कैसे छोड़ दें?