तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
कठिन निपट विकट घाटी प्रेम की, त्रबंक बंक...

Question: कठिन निपट विकट घाटी प्रेम की, त्रबंक बंको सूरो किनों न अगमाए। धार तरवार पर सचर सिनगार कर, सामी अंग सांगा रोम रोम भराए ।। प्रेम के रास्ते में तीन बंकर यानि रुकावटें कौन सी आती है बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: धनी के प्रेम का रास्ता बड़ा कठिन है। इसमें कई कर्मकाण्ड (शरीयत) उपासनाकाण्ड (तरीकत) और ज्ञानकाण्ड (हकीकत) के तीन टेढ़े रास्ते यानि की तीन बंकर हैं, जिन पर चलने वाले बड़े-बड़े शूरवीर भी इस प्रेम-मार्ग पर नहीं चल पाते। यह रास्ता तलवार की धार पर चलने के समान है। इस रास्ते में सामने से गुण, अंग, इन्द्रियों के भाले छेद रहे हैं, इसलिए हे मेरी आत्मा! तुम धैर्य और साहस का श्रृंगार करके चलो।