तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
हुकमें देखाया हुकम को, तिन हुकमें देख्या...

Question: हुकमें देखाया हुकम को, तिन हुकमें देख्या हुकम । भिस्त दोजख उन हुकमें, आखिर सुख सब दम ।। कृप्या इस पहेली को सुलझायें सुन्दरसाथ जी
Answer: धाम धनी की आज्ञा (आदेश) को हुकम कहा है इसी हुक्म ने रूहों को खेल दिखाने के लिए आगे 12000 और हुक्म स्वरूप माया के बनाये जिनको आत्मायें मूल मिलावे में बैठी इनीं हुक्म के सरूप के ऊपर अपनी नजर आत्म स्वरूप यह माया का खेल देख रही हैं इसीलिए वाणी में कहा है कि न कोई परमधाम से आया है और न ही कोई जाएगा । धाम धनी के हुक्म से ही आत्माओं ने इस हुक्म (आदेश) स्वरूप ब्रह्माण्ड को देखा है। संसार के सभी प्राणियों को न्याय (आखिरत) के दिन हुक्म से ही बहिश्तों का सुख प्राप्त होगा और दोजक में प्रायश्चित की अग्नि में जलना पड़ेगा।