तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
दो हिजाब जर मोती के, बीच राह साल सत्तर |...

Question: दो हिजाब जर मोती के, बीच राह साल सत्तर | हक महमंद दोऊ हिजाब में, आखिर बातें करी इन बेर || मा 1/17 की इस चौपाई का भेद बताईए सुन्दरसाथ जी
Answer: मुहम्मद साहब के बीच दो परदे एक जरी का और दूसरा मोतियों का बताया है इन दोनों परदों के बीच का रास्ता सत्तर साल का है सम्वत् १६७८ से १७४८ श्याम जी के मन्दिर से लेकर पन्ना तक श्री राज महाराज की पूरी वाणी आ गई