आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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Shri Nijanand Samparday

आगूं अर्श चबूतरे, हम सखियाँ बैठत मिलकर । ऐ सुख हमारे कहाँ गये, खेलत नाचत बंदर ॥परि. 20/15 इस चौपाई में कहाँ का वर्णन हो रहा है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

रंगमहल जिसके सामने भोम भर की सीढ़ियाँ उतरी हैं। इस चौक के दायें-बायें, 4-4 मंदिरों के सामने, 4 मंदिर के लंबे व 2 मंदिर के चौड़े दो चबूतरे हैं। जिस पर सिंहासन व कुर्सियों की अपरम्पार शोभा है। इन चबूतरों पर जब श्रीराजश्यामाजी एवं सखियाँ विराजमान होते हैं तो सामने चाँदनी चौक में अनेक प्रकार के सुंदर पशु-पक्षी अपनी मधुर वाणी से बोलकर, गाकर, खेलकर, नाचकर धनी को रिझाते हैं, सखियों को हँसाते हैंइसलिए इन...

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Shri Nijanand Samparday

दो दरिया बीच एक जिमी, दो जिमी बीच दरिया एक I परिकरमा के इन दो चरणों में परमधाम का कहाँ का वर्णन आता है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

आठ सागर आठ जिमीं का

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24 हांस का मोहोल परमधाम में कहाँ पर आया है और उसकी क्या शोभा आई है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

हौजकौसर ताल के दक्षिण दिशा में साढ़े चार लाख कोस की दूरी पर 24 हांस का महल शोभायमान है। जो पांच भोम ऊँचा है सर्वप्रथम 24 हांस का, भोम भर ऊँचा चबूतरा है,चबूतरे से भोम भर नीचे रौंस पर 24 कुण्ड हैं। इन्हीं कुण्डों पर छठी चांदनी से ऊपर से पानी धाराओं के रूप में बगीचों में गिरता है। 24 हांस का महल चारों तरफ से फव्वारों व झरनों से ढका होने के कारण शीतलता के साथ साथ अत्यंत सुंदर शोभा प्रदान कर रहा है। इ...

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दो दरिया बीच एक जिमी, दो जिमी बीच दरिया एक I परिकरमा के इन दो चरणों में परमधाम का कहाँ का वर्णन आता है बताईए सुन्दरसाथ जी

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आठ सागर आठ जिमीं का

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ए जो मोमिन अक्स कहे,जानों आए दुनियां माहें। हक अर्स कर बैठे दिल को, जुदे इत भी छोड़े नाहें।। सिंन . प्र. 21/82 अर्थ बताईए साथ जी

by Shri Nijanand Samparday

प्रणाम सुंदरसाथ जी अर्थ श्री महामति जी मोमीनों को बता रहे हैं यह जो मोमिन प्रतिबिंब संसार में कहे गए हैं, इससे लगता है कि मोमिन दुनियां में आए हैं और इनके दिलों में श्री राजजी महाराज अर्श करके बैठे हैं और यहां भी उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं।इनकी प्रतिबिंब की जो परआतम है उसको श्री राजजी महाराज का स्वरूप आनंदित करता है, इसलिए जिनमें परमधाम की शक्ति है वह संसार में कैसे हिम्मत छोड़े? दुनिया तो पारब्र...

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