तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
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बसरी सूरत(आत्म अक्षर जोश धनी धाम) को ही यहाँ पर महमंद कहा है और मोमिनों को उनके भाई करके कहा गया है जो तब अरब में नहीं उतरे थे रसूल साहब जब इस दुनिया में आए तो उस वक़्त उसके भाई मोमिन इस दुनिया में आए नहीं थे तो उस वक़्त रसूल साहब ने शरियत की राह चलाई और आखिरत के वक़्त में फिर आने का वायदा किया था
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श्री राज जी महाराज तीन बार सिनगार करते हैं एक तीसरी भोम की पड़साल दूसरा नीलो न पीलो मंदिर में तीन बजे और तीसरा वनों में झीलना के बाद और श्री श्यामा जी और रूहें दो बार सिनगार करती हैं एक तीसरी भोम की पड़साल और दूसरा वनों में झीलना के बाद
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जिब्रील असराफील और अजाजील
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महावन की एक हजारवीं भोम से हम सीधा पुखराज पहाड़ की चांदनी पर जा सकते हैं
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रंगमहल की पहली से आठवीं भोम तक तैंतीस हाथ के चौड़े छज्जे आये हैं नवमी भोम का सौ हाथ यानि एक मन्दिर का चौड़ा छज्जा आया है और रंगमहल की पूर्व में जो दस मन्दिर का एक हाँस आया है उनके पहली से नवमीं तक दो मन्दिर के चौड़े छज्जें कठेड़े के साथ सुशोभित हैं
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