दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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जो सत्य ( अखंड) है ,चेतन ( निरंतर लीला करने वाला ) और आनंद देने की क्रिया करता है। सत्य +चित्त +आनंद =सच्चिदानंद अर्थात पूर्ण ब्रह्म परमात्मा श्री राज जी महाराज ही हैं । इस जागनी लीला में कुरान में भी खुदा की तीन सूरत का ब्यान किया है जिसे बसरी अर्थात सत , मलकी अर्थात आनंद ,हकी अर्थात चिदघन कहा है
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ईसा रूहअल्ला (श्यामा जी के पहले तन श्री देवचन्द्र जी) में जब मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम (अक्षर की आत्मा) का प्रवेश हुआ तो उस स्वरूप को अहमद कहलाने की शोभा मिली। जब यह स्वरूप श्यामा जी के दूसरे तन (श्री मिहिरराज जी) में मेंहदी (महामति) में मिला तो इन तीनों स्वरूपों को ईमाम अर्थात् (प्राणनाथ) कहा गया। पांचों शक्तियों के श्री इन्द्रावती जी के धाम-हृदय में विराजमान होने पर उन्हें महामति की शोभा म...
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आवो जी वाला मारे घेर यह प्रकरण तीन चौपाई का श्री किरंतन किताब में से है
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पूर्व में 16 देहुरी के घाट की जमीन से एक भोम नीचे जल की जमीन आई है उसी जमीन से 9 भंभों की 5 हारें आने से 44 थंभ आये हैं बीच वाला थंभ कुंड की वजह से नहीं आया अब इन 44 थंभों के ऊपर जमीन पर 7 थंभों की 5 हारें आने से 34 थंभों की शोभा आई है यहाँ भी कुंड के लिए बीच वाला थंभ नहीं आया है
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परमधाम में पश्चिमी चौगान 9 लाख कोस लम्बा 4.5 लाख कोस चौड़ा रंग बिरंगी रेती का एक मैदान आया है। यहाँ अति सुन्दर चौंक बने हुए हैं श्री राज स्यामा जी सखियों और परमधाम के पशु पक्षियों के लश्कर को लेकर कृष्ण पक्ष की पांचमी को यहाँ आते हैं इन चौकों में कई तरह के खेल तमाशे होते हैं पशु पक्षियों पर सवारी करते हैं पशु पक्षी कई तरह के करतब करते हैं रेती में दौड़ना कूदना भमरियां खाना ऐसी कई तरह की हांस विनो...
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