दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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स्वपन की व्यास जी की भागवत में थोड़ा सा रास का वर्णन आता है वोह भी जो इस कालमाया के ब्रह्मांड मे खेली गई थी योगमाया की रास बिना जाग्रत बुद्ध के किसी को पता नही चल सकती , इसलिए हमारी जो भागवत है वोह श्री रास ग्रन्थ है जिसमें सम्पूर्ण लीला का वर्णन आता है । श्याम जी के मन्दिर में राजी जाग्रत बुद्ध को साथ लेकर आए थे तभी देवचन्द्र जी द्वारा गांग जी भाई को जाग्रत बुद्ध की पहचान देने के बाद ब्रज रास...
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सूरत से
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अक्षरब्रहम जी ने ब्रज में जो 24 हजार सुरतांए धारण की थी उनको ही कुमारिका सखियां कहा गया है
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Pp
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क्योंकि श्री प्राणनाथ जी श्री जी साहिब जी ने पंचमी वाले दिन श्री गुम्मट जी की तरहटी में समाधी अवस्था ले ली और श्री लाल दास जी को अपना जोश देकर धनी जी ने मूलमिलावा की रदबदल से लेकर पन्ना जी तक की सारी लीला श्री बीतक साहिब के सरूप मे लिखवाई । श्री लालदास जी ने सावन मास की पंचम से बीतक लिखनी शुरू की और भादोंमास की अष्टमी को पूरी की । इसी संदर्भ में श्री निजानंद सम्प्रदाय के हरेक मन्दिर में श्री बीतक...
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