आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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परमधाम में रंगमहल के आगे अमृतवन के पूर्व से पाट घाट जाते हुए हमें किन किन जगहों को पार करना होगा वर्णन करें सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

सबसे पहले 500 मन्दिर की चौड़ी पुखराजी रौंस जिसके दायें बायें दो भोम के ऊँचे बड़ो वन के वृक्ष आए हैं, फिर 250 मन्दिर की चौड़ी वन रौंस आई है जिसपर हरी गिलम बिछी है और इसके आगे कमर भर ऊँची 250 मन्दिर की चौड़ी पाल आती है जिस पर बड़े वन की वृक्षों की 5 हारें पाँच भोम की शोभा झूलो के संग ले रही हैं फिर पाल से कमर भर नीचे उतर कर जल रौंस 250 मन्दिर की चौड़ी पार करके पाट घाट पहुँच जायेंगे

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रूहें आइयां खेल देखने,आए महंमद मेहेदी देखावन । तीनों हादी खेल देखाए के, दोऊ गिरो ले आवें वतन ।। खु.4/19 इस चौपाई में तीन हादी कौन से हैं बताईए सुन्दर साथ जी

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रूहें खेल देखने के वास्ते संसार में आई हैं और श्री प्राणनाथजी और श्यामाजी खेल दिखाने के वास्ते आए हैं तीनों हादी अक्षर , श्री स्यामा जी , और श्री प्राणनाथ जी (बसरी, मलकी और हकी) रूहों को खेल दिखाकर ब्रह्मसृष्टि और ईश्वरीसृष्टि को लेकर अपने घर वापस जाएंगे।

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ये परमधाम में कहाँ का दृश्य है बताईए सुन्दरसाथ जी

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मूलकुंड और ढपी यमुना जी का

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श्री कुलज़म सरूप साहिब में श्री प्राणनाथ जी ने माया के हथियारों का वर्णन किया है वोह क्या हैं बताईए सुन्दरसाथ जी

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एहना आउध अमृत रुप रस,छल बल वल अकल अगिन कुटिल कोमल चंचल चतुर चपल यह माया के 13 हथियार हैं जो श्री प्राणनाथ जी ने श्री मुखवाणी में बताए हैं

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लीला दोऊ पेहेले करी, दूजे फेरे भी दोए। बिना तारतम ए माएने, न जाने कोए ।। १२६ ।। बेहद वाणी की इस चौपाई का भेद बताईए सुन्दरसाथ जी कि दो फेरों में कौन सी 2-2 लीलायें हुई

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पहले फेरे में दो लीलाएं (ब्रज और रास)। दूसरे फेरे में भी दो लीलाएं कीं। एक नौतनपुरी में और दूसरी श्री पद्मावतीपुरी में। बिना तारतम वाणी के यह भेद कोई नहीं जान सकता।

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