तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।
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दुनियां के जीव तो पारब्रह्म के लौकिक नाम 'श्री कृष्ण अनादि अक्षरातीत' सुनने से आवागमन के चक्कर छूट कर भवसागर से पार होकर अखण्ड हो जायेंगे, पर रूहों ने तो तिन पार के भी पार परमधाम में जो असल नाम " श्री जी साहेब श्यामा श्याम" है, वहां जाना है। मोमिनों के दिल को श्री राजजी का अर्श कहा है जो दिल श्री जी साहेब श्यामा श्याम से जुड़े हैं जिसकी गवाही कुरान देता है।
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जूनागढ़ जाते हुए धोरा जी मार्ग पर श्री जी की मुलाकात श्री तेजकुंवरी जी से हुई तेज कुंवंरी जी अपने पिता के साथ जल भरने आई थीं जैसे ही श्री तेज कुंवंरी जी ने श्री जी को देखा उन्होंने घूंघट ओढ़ लिया और पिता के पूछने पर बताया कि वोह मेरे पति हैं श्री जी से पूछने पर सारी बात सच निकली कि श्री तेजकुंवंरी जी के तन में अमला वती सखी की वासना है इससे पहले अमलावती जी को जो नश्वर तन मिला वो फूलबाई जी का था जो...
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परमधाम की जमीन पचास हजार योजन की है जो मोमिनों को कुलजम सरूप की वाणी के नुस्खे से प्राप्त हुई। मोमिनों के अर्श दिल ही हवेलियां हैं। जो कुलजम सरूप की वाणी के बिना वीरान थीं। श्री प्राणनाथजी महाराज ने अपनी वाणी से पहचान कराकर इन मोमिनों को जागृत कर दिया।
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जब चोपड़ा की हवेली में श्री छत्रसाल जी ने श्री जी साहेब जी की पघरावनी करके उनकी युगल सरूप की पहचान करके श्री बाईजू राज महारानी जी को साथ बिठा कर आरती करने लगे तो श्री जी इमाम मेहेंदी श्री प्राणनाथजी ने छत्रसाल से पूछा कि हमारे लिए तुम क्या नजराने (भेंट) लाए हो महाराजा छत्रसालजी ने कहा कि बुन्देलखण्ड की पांच हजार कोस की बस्ती अर्थात् यह मेरा पांच तत्व का शरीर, गुण, अंग इन्द्रियों सहित आपकी सेवा में...
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