दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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जूनागढ़ जाते हुए धोरा जी मार्ग पर श्री जी की मुलाकात श्री तेजकुंवरी जी से हुई तेज कुंवंरी जी अपने पिता के साथ जल भरने आई थीं जैसे ही श्री तेज कुंवंरी जी ने श्री जी को देखा उन्होंने घूंघट ओढ़ लिया और पिता के पूछने पर बताया कि वोह मेरे पति हैं श्री जी से पूछने पर सारी बात सच निकली कि श्री तेजकुंवंरी जी के तन में अमला वती सखी की वासना है इससे पहले अमलावती जी को जो नश्वर तन मिला वो फूलबाई जी का था जो...
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परमधाम की जमीन पचास हजार योजन की है जो मोमिनों को कुलजम सरूप की वाणी के नुस्खे से प्राप्त हुई। मोमिनों के अर्श दिल ही हवेलियां हैं। जो कुलजम सरूप की वाणी के बिना वीरान थीं। श्री प्राणनाथजी महाराज ने अपनी वाणी से पहचान कराकर इन मोमिनों को जागृत कर दिया।
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जब चोपड़ा की हवेली में श्री छत्रसाल जी ने श्री जी साहेब जी की पघरावनी करके उनकी युगल सरूप की पहचान करके श्री बाईजू राज महारानी जी को साथ बिठा कर आरती करने लगे तो श्री जी इमाम मेहेंदी श्री प्राणनाथजी ने छत्रसाल से पूछा कि हमारे लिए तुम क्या नजराने (भेंट) लाए हो महाराजा छत्रसालजी ने कहा कि बुन्देलखण्ड की पांच हजार कोस की बस्ती अर्थात् यह मेरा पांच तत्व का शरीर, गुण, अंग इन्द्रियों सहित आपकी सेवा में...
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सबसे पहले 500 मन्दिर की चौड़ी पुखराजी रौंस जिसके दायें बायें दो भोम के ऊँचे बड़ो वन के वृक्ष आए हैं, फिर 250 मन्दिर की चौड़ी वन रौंस आई है जिसपर हरी गिलम बिछी है और इसके आगे कमर भर ऊँची 250 मन्दिर की चौड़ी पाल आती है जिस पर बड़े वन की वृक्षों की 5 हारें पाँच भोम की शोभा झूलो के संग ले रही हैं फिर पाल से कमर भर नीचे उतर कर जल रौंस 250 मन्दिर की चौड़ी पार करके पाट घाट पहुँच जायेंगे
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