दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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रूहें खेल देखने के वास्ते संसार में आई हैं और श्री प्राणनाथजी और श्यामाजी खेल दिखाने के वास्ते आए हैं तीनों हादी अक्षर , श्री स्यामा जी , और श्री प्राणनाथ जी (बसरी, मलकी और हकी) रूहों को खेल दिखाकर ब्रह्मसृष्टि और ईश्वरीसृष्टि को लेकर अपने घर वापस जाएंगे।
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एहना आउध अमृत रुप रस,छल बल वल अकल अगिन कुटिल कोमल चंचल चतुर चपल यह माया के 13 हथियार हैं जो श्री प्राणनाथ जी ने श्री मुखवाणी में बताए हैं
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पहले फेरे में दो लीलाएं (ब्रज और रास)। दूसरे फेरे में भी दो लीलाएं कीं। एक नौतनपुरी में और दूसरी श्री पद्मावतीपुरी में। बिना तारतम वाणी के यह भेद कोई नहीं जान सकता।
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श्री रास ग्रन्थ तारतम से शुरू होता है इसकी 6 चौपाई और पहले प्रकरण की 84 चौपाई दोनों मिलाकर 90 चौपाई होती है इसका मतलब की तारतम की 6 चौपाईयां मिला कर ही पूरे श्री कुलजम सरूप साहिब की 18758 चौपाई पूरी होती हैं प्रणाम जी
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