दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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इसमें माया के बारे में बात हो रही है कि इसने शुकदेव मुनि तथा सनकादिक ऋषियों (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत कुमार) को भी इसने नहीं छोड़ा। लक्ष्मी और नारायण जो जगत के परमात्मा हैं, को भी इस माया ने अपने फन्दे में फंसा रखा है। बैकुण्ठ में बैठे विष्णु भगवान को भी अपने अन्दर ले लिया है, अर्थात् समुद्र से पहाड़ की चोटी तक (पाताल से बैकुण्ठ व नारायण भगवान सन्पूर्ण क्षर पुरुष) किसी को माया ने नहीं छोड़ा।
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पश्चिम की चौगान
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अब दूसरी बार हुकम के स्वरूप श्री मुहम्मद साहब जिनमें आत्म अक्षर और जोश धनी धाम दो शक्तियां थी जो ब्रज रास खेल कर अरब में श्री महमंद साहब के अंदर आ गई थी वोह और श्री श्यामाजी दोनों मिलकर श्री प्राणनाथजी हकी सरूप के अन्दर हैं और वही सखियां भी फिर सुन्दरसाथ के रूप में आई हैं। यह श्री प्राणनाथजी के अन्दर पांचों शक्तियों (धनीजी का जोश, श्यामाजी, आत्म-अक्षर, जागृत बुद्धि और हुकम) के दर्शन करती हैं। यह स...
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सुन्दर साथ जी श्री परमधाम में श्री नूर बाग की चांदनी पर फूलबाग की शोभा आई है जिसमें नहरें चेहेबच्चे,और बगीचों में असंख्य फूलों की अपरम्पार शोभा आई है
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श्री कुलज़म सरूप साहिब की 18758 चौपाईयां ही आखिरत के वचन हैं जो हम सुन्दरसाथ के लिए श्री जी साहिब जी ने कहे हैं वाणी में भी आता है पिछले कारण वाणी कही प्रणाम जी
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