दुल्हे ने दिल हाल दे, खैंच लिए दिल सारे ।
कहा कहूं सुख इन विध, जो किए हाल हमारे॥
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हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।
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सतसरूप ब्रह्म श्री अक्षर ब्रह्म के अहं का सरूप है जो योगमाया में रहता है
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अब दूसरी बार हुकम के स्वरूप श्री मुहम्मद साहब जिनमें आत्म अक्षर और जोश धनी धाम दो शक्तियां थी जो ब्रज रास खेल कर अरब में श्री महमंद साहब के अंदर आ गई थी वोह और श्री श्यामाजी दोनों मिलकर श्री प्राणनाथजी हकी सरूप के अन्दर हैं और वही सखियां भी फिर सुन्दरसाथ के रूप में आई हैं। यह श्री प्राणनाथजी के अन्दर पांचों शक्तियों (धनीजी का जोश, श्यामाजी, आत्म-अक्षर, जागृत बुद्धि और हुकम) के दर्शन करती हैं। यह स...
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यह सुन्दर दृश्य पुखराज पहाड़ का है इसमें पांच पेड़, उत्तर पश्चिम की घाटी , बंगलों की शोभा , सोलह नहरों के गिरने का अनुपम दृश्य, आकाशी मोहोल, अधबीच का कुंड , ढपो चबुतरा . मूल कुंड इत्यादि और भी बहुत सारी बेशुमार शोभा से सुसज्जित है श्री पुखराज पहाड़
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हे सुन्दरसाथ जी! यदि आप अपने जीव के हृदय में विचार करके देखें, तो इस श्री कृष्ण नाम को तारतम में कैसे कहा जा सकता है?। उपरोक्त चौपाई में इसी सत्य को उद्घाटित किया जा रहा है कि शरीर के नाम श्री कृष्ण को तारतम में कैसे कहा जा सकता है?
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