जब याद तुमें मैं आंऊगा, तबहीं बैठोगे जाग ।
गए आए कहूं नहीं, सब रूहें बैठीं अंग लाग ।।
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जैसी साहेबी रूहन की, विध लखमीजी भी इन। वाहेदत में ना तफावत, पर ए जानें रूहें अर्स तन ।। रूहों की जैसी साहेबी परमधाम में है, लक्ष्मीजी को भी इसी तरह समझें। इनकी एकदिली में फर्क नहीं है, इसकी जानकारी रूहों को ही है जिनका तन परमधाम में है
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पहली जाहिरी मेहर धाम धनी जी ने पठान के वेश में दर्शन देकर बारात तक सकुशल पहुंचाया और पहली बातूनी मेहर श्याम जी के मन्दिर में दर्शन देकर उनकी और अपनी पूरी पेहेचान करा कर जाग्रत बुद्ध के साथ उनके हृदय कमल में विराजमान हुए
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फूलबाग के एक बगीचे में आड़े खड़े तीन तीन चबूतरे आने से सोलह छोटे बगीचों की शोभा आई है
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बसरी सरूप श्री महमंद साहेब मलकी सरूप श्री स्यामा महारानी हकी सरूप श्री प्राणनाथ जी कहीं भी इसमें कृष्ण का कोई वर्णन नही है यह जागनी लीला सिर्फ तीन सरूपों की ही है
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23 प्रश्न किए थे जिनका जवाब श्री निजानंद पद्धति में दिया गया है
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