आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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Shri Nijanand Samparday

यों लिख्या फुरमान में, आखिर बीच हिंदुअन । मुलक होसी नबियन का, धनी दई बड़ाई इन।। कौन सा मुल्क और कौन से नबी बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

कुरान में यह भी लिखा है कि आखिरत को हिन्दुओं के बीच सब नबी आएंगे। सारे भारतवर्ष में ही ब्रह्मसृष्टियां उतरेंगी। धनी ने ब्रह्मसृष्टियों को बड़ाई दी है।

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Shri Nijanand Samparday

साथ हतो जे इंद्रावती पासे, वाले पूरी तेनी आस रे। सकल मनोरथ पूरण थया रे, फलिया ते रास प्रकास रे।। ये कहाँ का प्रसंग है और कौन श्री इंद्रावती जी के साथ कहाँ था जिन की आस भी उन्होंने पूरी की थी बताई सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।

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Shri Nijanand Samparday

सतसरूप ब्रह्म किसको कहा है और ये कहाँ पर है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

सतसरूप ब्रह्म श्री अक्षर ब्रह्म के अहं का सरूप है जो योगमाया में रहता है

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फेर आए रसूल स्याम मिल, सोई फेर आये यार। देख निसवत पांचों दुनीमें, क्यों छोड़ें असल अर्स प्यार ।। इस चौ. का बेवरा करें सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

अब दूसरी बार हुकम के स्वरूप श्री मुहम्मद साहब जिनमें आत्म अक्षर और जोश धनी धाम दो शक्तियां थी जो ब्रज रास खेल कर अरब में श्री महमंद साहब के अंदर आ गई थी वोह और श्री श्यामाजी दोनों मिलकर श्री प्राणनाथजी हकी सरूप के अन्दर हैं और वही सखियां भी फिर सुन्दरसाथ के रूप में आई हैं। यह श्री प्राणनाथजी के अन्दर पांचों शक्तियों (धनीजी का जोश, श्यामाजी, आत्म-अक्षर, जागृत बुद्धि और हुकम) के दर्शन करती हैं। यह स...

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परमधाम में यह कहाँ का दृश्य है और इसमें से किन्हीं तीन जगह की पहचान कर के बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

यह सुन्दर दृश्य पुखराज पहाड़ का है इसमें पांच पेड़, उत्तर पश्चिम की घाटी , बंगलों की शोभा , सोलह नहरों के गिरने का अनुपम दृश्य, आकाशी मोहोल, अधबीच का कुंड , ढपो चबुतरा . मूल कुंड इत्यादि और भी बहुत सारी बेशुमार शोभा से सुसज्जित है श्री पुखराज पहाड़

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