आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

Quiz

View All Quiz Answer.

Shri Nijanand Samparday

महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकूरों आई। झूठी छूटे सांची पाइए, सतगुर लीजे रिझाई।। हम सतगुरु को इस खेल में कैसे रिझा सकते हैं बताईए सुन्दराथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री महामतिजी कहते हैं कि हे साथजी! तुम माया में सावधान हो जाओ। तुम्हारी निसबत होने के कारण ही धनी माया में आकर मिले हैं, अतः यदि इस झूठी दुनियां को छोड़कर रूह दुनी को पीठ देकर अखण्ड परमधाम के अखंड सुख याद करके अपने पिया को याद करती है तो वोह ऐसे सतगुरु को इस खेल में रिझा लेगी।

Read Quiz →

Shri Nijanand Samparday

हक आप सांचे होने को, सब विध कही सुभान । त्यों त्यों दिल ज्यादा चाहे, वास्ते करने ऊपर एहेसान ।। श्री राज जी ने सांचे होने के वास्ते क्या कहा था बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री राजजी महाराज ने अपने आप को सच्चा साबित करने के लिए सब कुछ पहले से ही बता दिया था कि माया में जाकर तुम सब मुझे भूल जाओगी , यह वियोग का खेल बड़ा दुखदायी है। तुम इसे कैसे सहन कर पाओगी । इससे मोमिनों के दिल में चाहना और बढ़ गई और कहा कि हमारे ऊपर एहसान क्यों कर रहे हो

Read Quiz →

Shri Nijanand Samparday

बानी मीठी नरमाई जोत धरे, मेरे जीव के एही जीवन ।। चौपाई के इन चरनों में किसकी वाणी की मिठास की बात कही गई है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री श्यामा महारानी के चरणों के चारों आभूषण झांझरी, घूंघरी, कांबी और कड़ला तथा चरणों के पंजे में अनवट और बिछुआ का तेज और सुन्दर सुरीली आवाज यह ही मेरे जीव के जीवन हैं।

Read Quiz →

Shri Nijanand Samparday

कठिन निपट विकट घाटी प्रेम की, त्रबंक बंको सूरो किनों न अगमाए। धार तरवार पर सचर सिनगार कर, सामी अंग सांगा रोम रोम भराए ।। प्रेम के रास्ते में तीन बंकर यानि रुकावटें कौन सी आती है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

धनी के प्रेम का रास्ता बड़ा कठिन है। इसमें कई कर्मकाण्ड (शरीयत) उपासनाकाण्ड (तरीकत) और ज्ञानकाण्ड (हकीकत) के तीन टेढ़े रास्ते यानि की तीन बंकर हैं, जिन पर चलने वाले बड़े-बड़े शूरवीर भी इस प्रेम-मार्ग पर नहीं चल पाते। यह रास्ता तलवार की धार पर चलने के समान है। इस रास्ते में सामने से गुण, अंग, इन्द्रियों के भाले छेद रहे हैं, इसलिए हे मेरी आत्मा! तुम धैर्य और साहस का श्रृंगार करके चलो।

Read Quiz →

Shri Nijanand Samparday

साथ हतो जे इंद्रावती पासे, वाले पूरी तेनी आस रे। सकल मनोरथ पूरण थया रे, फलिया ते रास प्रकास रे।। ये कहाँ का प्रसंग है और कौन श्री इंद्रावती जी के साथ कहाँ था जिन की आस भी उन्होंने पूरी की थी बताई सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

हवसा में श्री इन्द्रावतीजी के साथ जो दो और साथी थे, (सांवलिया ठाकुर और ऊधो ठाकुर) को भी दर्शन देकर उनकी भी चाहना राजजी ने पूर्ण की। इस प्रकार हमारी सब चाहना पूर्ण हो गई। रास और प्रकाश का फल मिल गया अर्थात् धनी मिल गए।

Read Quiz →