आज की चौपाई

श्री धनीजी के लागूँ पाए,मेरे पिउजी फेरा सुफल हो जाए।
ज्यों पिउ ओलखाए मेरे पिउजी ,सुनियो हो प्यारे मेरी विनती।।

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Shri Nijanand Samparday

पांच तत्वों की उत्पत्ति कहाँ से होती है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

मोह तत्व से पांच तत्वों की उत्पत्ति होती है

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प्यारे मेरे प्राण के, मोहे पल छोड़ो जिन। मैं पाई मेहेर मेहेबूब की, मेरे जीव के एही जीवन ।। इस चौपाई में प्यारे मेरे प्राण को और महबूब किसको कहा है बताईए सुन्दरसाथ जी

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हे मेरे प्राणों से भी प्यारे श्यामा महारानी ! अब मुझे एक पल के लिए भी छोड़ना नहीं। अब मुझे प्यारे मेहबूब श्री राजजी महाराज की मेहर से आपके चरण कमल की पहचान हो गई है। यही मेरे जीव के जीवन हैं।

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महामत कहें सावचेत होड्यो, मिल्या है अंकूरों आई। झूठी छूटे सांची पाइए, सतगुर लीजे रिझाई।। हम सतगुरु को इस खेल में कैसे रिझा सकते हैं बताईए सुन्दराथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री महामतिजी कहते हैं कि हे साथजी! तुम माया में सावधान हो जाओ। तुम्हारी निसबत होने के कारण ही धनी माया में आकर मिले हैं, अतः यदि इस झूठी दुनियां को छोड़कर रूह दुनी को पीठ देकर अखण्ड परमधाम के अखंड सुख याद करके अपने पिया को याद करती है तो वोह ऐसे सतगुरु को इस खेल में रिझा लेगी।

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हक आप सांचे होने को, सब विध कही सुभान । त्यों त्यों दिल ज्यादा चाहे, वास्ते करने ऊपर एहेसान ।। श्री राज जी ने सांचे होने के वास्ते क्या कहा था बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

श्री राजजी महाराज ने अपने आप को सच्चा साबित करने के लिए सब कुछ पहले से ही बता दिया था कि माया में जाकर तुम सब मुझे भूल जाओगी , यह वियोग का खेल बड़ा दुखदायी है। तुम इसे कैसे सहन कर पाओगी । इससे मोमिनों के दिल में चाहना और बढ़ गई और कहा कि हमारे ऊपर एहसान क्यों कर रहे हो

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