आज की चौपाई

तुम बैठे मेरे कदम तले, कहूं गईयां नाहीं दूर।
ऐ याद करो इन इस्क को, जो आपन करीं मजकूर।

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Shri Nijanand Samparday

हुकमें देखाया हुकम को, तिन हुकमें देख्या हुकम । भिस्त दोजख उन हुकमें, आखिर सुख सब दम ।। कृप्या इस पहेली को सुलझायें सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

धाम धनी की आज्ञा (आदेश) को हुकम कहा है इसी हुक्म ने रूहों को खेल दिखाने के लिए आगे 12000 और हुक्म स्वरूप माया के बनाये जिनको आत्मायें मूल मिलावे में बैठी इनीं हुक्म के सरूप के ऊपर अपनी नजर आत्म स्वरूप यह माया का खेल देख रही हैं इसीलिए वाणी में कहा है कि न कोई परमधाम से आया है और न ही कोई जाएगा । धाम धनी के हुक्म से ही आत्माओं ने इस हुक्म (आदेश) स्वरूप ब्रह्माण्ड को देखा है। संसार के सभी प्राणियों...

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Shri Nijanand Samparday

ईमान इश्क आत्म के दो पर हैं वोह उसे वाणी की कौन सी न्यामत मिलने पर मिलते हैं बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

जाग्रत बुद्धि की न्यामत से आत्म को ईमान मिलता है और निज बुद्ध की न्यामत से इश्क मिलता है

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Shri Nijanand Samparday

"दुख रे प्यारो मेरे प्राण को" किरंतन के इस प्रकरण में "महामत खेलें अपने लाल सों " में किस लाल से तात्पर्य है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

अपने पिया संग खेलती है जो सारे ब्रहमांड के अक्षरातीत हैं

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Shri Nijanand Samparday

हौज कौसर की पाल के नीचे कितने मन्दिरों की हार और कितने थंभों की हार के साथ कितनी गलियां आईं है बताईए सुन्दरसाथ जी

by Shri Nijanand Samparday

दो मंदिरों की हार के बीच में दो थंभों की हार में तीन गलियां सुशोभित हैं

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